अब मुझे बस दो कहानी याद है

अब मुझे बस दो कहानी याद है,
इक मेरा बचपना, तेरी जवानी याद है।


भीड़ में तेरा नज़रें चुराना भूल गया,
अँधेरी रातों की मेहरबानी याद है।


तुझसे मिलना तो एक मुकाबले जैसा था,
मुझे आज भी मौसम तूफानी याद है।


तुम सा ही नमकीन, थोडा तीखा और चटपटा,
क्या तुम्हे उस गुपचुप का पानी याद है?


रेशमी बाल, कमर का तिल , और मत पूछो क्या क्या...
मुझे तेरी हर निशानी याद है।


तारीख: 16.07.2017                                                        रुद्रप्रताप साहू






नीचे कमेंट करके रचनाकर को प्रोत्साहित कीजिये, आपका प्रोत्साहन ही लेखक की असली सफलता है