बहुत  तड़पाया  है तुमने  मुझे  हर बार होली में

बहुत  तड़पाया  है तुमने  मुझे  हर बार होली में, 
लगा गले से जी भर के रंग मुझे इस बार होली में.

मन्नतें  मैने बहुत  की  तेरा  जो  दीदार  हो  जाए, 
ख्वाहीश मेरी पूरी  हुई मेरे यार दिलदार होली में.

बार-बार तेरा मुस्कुराना शर्माना नजरें झुका लेना, 
तुझे भी इश्क है मुझे दिखने लगे आसार होली में.

बहुत  हुआ अब छुप-छुप कर मिलना मुस्कुराना, 
आओ कर लें  आज  खुलेआम इजहार होली में.

मोहब्बतों की  पिचकारी की धार  से तुझे रंग दूं, 
आ  तोड़  दें  सारी  हदों  की  दीवार  होली  में.

इनायत खुदा की खुशकिस्मत हूँ जो मुझे तुम मिली, 
सूने दिल में आने दो बहार मत करो इन्कार होली में.

चारों  ओर जैसे रंगों की खुशियाँ  बिखर  गयी है, 
बहारें आ  रहीं गुलों  पर हो  रहें गुलज़ार होली में.

तेरे गुलाबी गालों पर मैंने गुलाल जो लगाया है ' देव', 
और  भी  आज  हो  रहे  हसीन  रुखसार होली में.


तारीख: 15.06.2017                                                        देवांशु मौर्या






नीचे कमेंट करके रचनाकर को प्रोत्साहित कीजिये, आपका प्रोत्साहन ही लेखक की असली सफलता है