धूल माँ के पैर की

धूल माँ के पैर की माथे लगाने दो मुझे
देश के खातिर जरा हस्ती मिटाने दो मुझे ।
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ख्वाब सारे यार उनके अब सजाने दो मुझे
रात भर ख्वाबों में उनको ही सताने दो मुझे ।
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यूँ नजर मुझसे चुराकर आज तुम जाना नही 
बात जो आयी लबों पर वो बताने दो मुझे ।
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शहर तूने आज मुझको दे दिया सब कुछ मगर
हो सके तो यार मेरे वो पुराने दो मुझे ।
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ज़िन्दगी की साथ चलकर हो गया बूढ़ा रिशू
अब गजल में ही जवां खुद को बताने दो मुझे ।


तारीख: 15.06.2017                                                        ऋषभ शर्मा रिशु






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