दिल के अहम जला के मिल

दिल के अहम जला के मिल |
कद से कद  मिला के मिल ||

फिर से  दोस्त  बनेंगे  सब,
बीती  बात  भुला के  मिल ||

रखा है जो दिल में खींच,
लकीरें  वो  मिटा के  मिल ||

छलक  उठेगा नूर  नया,
सबसे खिलखिला के मिल ||

हवा भी न हो दरमियान,
दायरे  सब  हटा के मिल ||

राह चलते हम मिले खूब,
कभी तो घर बुला के मिल ||

मैं भी पाक तू भी  पाक,
प्रेम–गंगा बहा के मिल ||


तारीख: 19.06.2017                                                        महेश कुमार कुलदीप






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