दिल में सौ दर्द पाले बहन-बेटियां

दिल में सौ दर्द पाले बहन-बेटियां
घर  में  बांटें उजाले बहन-बेटियां

कामना  एक मन में सहेजे हुए
जा रही हैं शिवाले बहन-बेटियां

ऐसी बातें कि पूरे सफ़र चुप रहीं
शर्म की शाल डाले बहन-बेटियां

हो रहीं शादियों के बहाने बहुत
भेड़ियों के हवाले बहन-बेटियां

गांव-घर की निगाहों के दो रूप हैं
कोई  कैसे  संभाले  बहन-बेटियां


तारीख: 19.06.2017                                                        ओमप्रकाश यती






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