घर के आगे बरगद के निचे

जवान  भी अगर  बच्चे सा चीख कर  रोता तो अच्छा होता |

माँ बीमार रहती है आजकल मैं डॉक्टर होता तो अच्छा होता |

 

एक पत्थर सरीखी है मिटटी के बदन में ए ज़िन्दगी |

तुझपे मिन्नतों का कुछ असर होता तो अच्छा होता |

 

आज काम से लौट-ते ख्याल आ गया एक पीछे पीछे |

घर के आगे बरगद के  निचे दफ्तर होता तो अच्छा होता |

 

मज़ारो पे भी साहब बरसने लगी हैं गोलियां|

मुस्लमान मुस्लमान नहीं काफिर होता तो अच्छा होता |

 


तारीख: 21.07.2017                                                        मुंतज़िर






नीचे कमेंट करके रचनाकर को प्रोत्साहित कीजिये, आपका प्रोत्साहन ही लेखक की असली सफलता है