हालतें  कुछ ऐसी हैं

 

मेरा मक्सद मुझे पसन्द नहीं, पर ये पूरा हो जायेगा
हाथ थाम तो लूँ इसका, पर ख़्वाब तन्हा हो जायेगा

वक़्त मुझे तू, मोहलत अभी थोड़ी ज्यादा दे
तू और मैं दोनों यहीं रहेंगें, हिसाब बाद में हो जायेगा

मेरी हरकतों, मेरी ज़िंदगी पर इतना ध्यान ना लगा
मुझे समझने में तू पूरा बरबाद हो जायेगा

धक्का-मुक्की इतनी है कि खुदा के लिये वक़्त नहीं
जब भी गिरूँगा तो सजदा हो जायेगा

फिर से सितारों के साथ शराब पीने का मन है
मैंने पूछा है परिन्दों से आसमान कब तक साफ हो जायेगा


तारीख: 05.08.2017                                                        अंकित अग्रवाल






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