हो मुमकिन तुझ पे तो साँसे वार दूँ

हो मुमकिन तुझ पे तो साँसे वार दूँ
लेकर आंसू तेरे  खुशियाँ हज़ार दूँ ।

लग न जाए नज़र ज़माने भर की
पास आओ जरा नज़र उतार दूँ ।

किस्मत में लिखा क्या किसको पता
हांथो में हाथ ले कुछ पल गुज़ार दूँ ।

ए ज़िन्दगी कर मुक़र्रर वक़्त ऐसा
उसको अपने हांथो से सवाँर दूँ ।

जब कभी चाहें वो भीगना मुझसँग
करूँ ऐसा सावन की पहली फुहार दूँ ।

वादे में तू जो मांगे कुछ पल भले ही
सात जन्मों का तुझको इज़हार दूँ ।


तारीख: 16.06.2017                                                        ऋषभ शर्मा रिशु






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