जल रहा है वतन ,आप गज़ल कह रहे हैं

जल रहा है वतन ,आप गज़ल कह रहे हैं
सदमे में है ज़ेहन ,आप गज़ल कह रहे हैं ।

कुछ तो शर्म करें अपनी बेबसी पे आप
जख्मी है बदन ,आप गज़ल कह रहे हैं ।

जले घर , लूटी दुकानें, गई कितनी जानें
उजड़ गया चमन,आप गज़ल कह रहे हैं ।

कर ली खुलूस ने खुदकुशि खामोशी से
सहम गया अमन ,आप गज़ल कह रहे हैं ।

खौफज़दा चीखों में लाचारगी के दर्दोगम,
है दिल में दफ़न ,आप गज़ल कह रहे हैं ।

दोस्ती,भाईचारा,और भरोसे की लाशों ने
ओढ़ लिया कफ़न ,आप गज़ल कह रहे हैं ।

रास्ते,गलियाँ,घर बाज़ार सब वही है मगर
है कहाँ अपनापन आप गज़ल कह रहे हैं ।

क्या कहें अजय हालत मंदिरो,मस्जिदों की
सब हैं आज रेहन आप गज़ल कह रहे हैं


तारीख: 20.03.2020                                                        अजय प्रसाद






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