जिस जुर्म की ये सजा है दुनिया

जिस जुर्म की ये सजा है दुनिया !
देखो  उसी की दवा है दुनिया !!

यूँ तो जुबाँ से वफा रही है
दिल से मगर बेवफा है दुनिया !!

काँटो का है रास्ता कभी फिर
बच्चो की प्यारी खता है दुनिया !!

है दो जखी सा यहाँ का आलम 
जन्नत का पर रास्ता है दुनिया !!

यूँ लापता तो हमीं हुये पर
उस लापता का पता है दुनिया !!

शैतान कोई कहे है इसको 
कोई कहे दिलरूबा है दुनिया !!

ठुकरा रहा था जिसे ये अबतक 
पर अब उसी पर फिदा है दुनिया !!

आकर यहाँ भूल ही गया मैं 
अपना तो बस मायका है दुनिया !!


तारीख: 17.06.2017                                                         देव मणि मिश्र






नीचे कमेंट करके रचनाकर को प्रोत्साहित कीजिये, आपका प्रोत्साहन ही लेखक की असली सफलता है