कच्चे पुलों कि मानिंद निकले दोस्त मे

कच्चे पुलों कि मानिंद निकले दोस्त मेरे ,
जरा वजन जो पड़ा, एकदम से टूट गए,

आह री मतलबपरस्ती, वाह री दुनियादारी ,
भरोसों पर थे किये, भरोसे, अपने छूट गए,

ऐसा नहीं कि हुई है दफ़न सारी उम्मीदें ,
दगा  देने को अभी नाम है कई , छूट गए,

इलज़ाम जब दूँ किसी पे जो कोई गैर होता,
तुझे  तो अपने ही यार मेरे, लूट गए ,

कच्चे पुलों कि मानिंद निकले दोस्त मेरे ,
जरा वजन जो पड़ा, एकदम से टूट गए !!


तारीख: 17.06.2017                                                        राज भंडारी






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