किसी भी मोड़ पर मिल जाए

                        
किसी भी मोड़ पर मिल जाए ये सोचा भी करते है, 
उन्हें  हम याद कर  सच में बहुत  रोया भी करते है. 

ख्यालों में मेरे उनका आना जाना तो रोज का ही है, 
इसी  तलब  से  हम  रातों  में  सोया  भी  करते  है.
 
कभी   तो   मुकम्मल   होगी  मुझे  मेरी  चाहत, 
हर रोज खुदा से दुआओं में उन्हें मांँगा भी करते है. 

आंखों को  बडी  ही  राहत  मिलती  है उन्हें देखकर, 
सहर से शाम तक उन्हें बातों में उलझाया भी करते है. 

मुश्किलें  तो  बहुत  आती  है  मेरे  उनके  दरमियान, 
तड़फ जाते है हम दीदार को मगर हम पर्दा भी करते है. 

फिक्र होती है कोई तो लेकर आए उनकी खबर, 
परिंदों को हम अपने छतों से उड़ाया भी करते है.
 
नाराज़  हैं  वो  शायद  हमसे  बस  इसी  डर से, 
चुपचाप कॉलेज के रस्ते पर उन्हें देखा भी करते है.
 
बहुत  मशरुफ  हूँ  मै  जहाँ  के  लोगों  के  लिए,
फुर्सत से हम उनके लिए ग़ज़लें गाया भी करते है.
 
कभी तो समझ होगी उन्हें मेरे  जज्बातों की ' देव', 
कहकर इस दिल को बहुत समझाया भी करते है. 

सच्चे दिल से चाहा है मैने उन्हें हमेशा सलामत रहें, 
उनके लिए मंदिरों मस्जिदों पे सर झुकाया भी करते है.
                                        


तारीख: 16.06.2017                                                        देवांशु मौर्या






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