मैं पत्ता तूं आंधी

 

हैं हसरतें अर्श से फर्श कोअरमान भी ठहरे ठहरे

चल आंधी से पहले,  चाहतों को झूला तो झूला दें

 

जाते होचले जाईयेरेत का गुबार मेरी नजर कर

रेत भी शराब जान पियूंजो तेरी महक से मिला दे

 

मैं पत्ता तूं आंधीहै गुजर जाना तेरा शौके वाबस्ता

ये तो बतातेरे जाने के बाद तेरा क्या क्या भुला दें

 

जर्रे की तरह रहा हूँ आगोश में तेरे,  इक करम कर

जाते - जातेबस एक बार और जी भर के रुला दे

 

हूं पिंजरे मेंतेज हवाओं की जद में भी बेखबर सा

संभल  आंधीये चिराग तेरा आशियाँ ना जला दे

 

जिंदगी की आँधि में,  बरसों से मैं सो नहीं पाया हूँ

आख़िरी नींद चाहता हूंजो तूं तेरे पहलू में सूला दे


तारीख: 22.07.2019                                                        उत्तम दिनोदिया






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