मेरे मुल्क का मौसम खुशगवार नही है

मेरे मुल्क का मौसम खुशगवार नही है
यहाँ आदमी को आदमी से प्यार नही है ।
*****
दो निवाले को लेते जान बेजुबान की
क्या तुमको खुदपर धिक्कार नही है ।
*****
घर वाले कहते कर ले बेटा शादी
पर मेरा अभी कोई विचार नही है ।
*****
सब है अपने अपने हुनर के मालिक
आदमी कोई भी यहाँ बेकार नही है ।
*****
लोगों के दिलों में हो जिन्दा ग़ालिब
तुम जैसा कोई यहाँ फनकार नही है ।
*****
मेरा नाम जुड़ा उससे है बेशक
मुझको भी इससे इनकार नही है ।
******
सिसकियां क्यू लेती हो मेरे नाम का 
गर मुझसे तेरा कोई इज़्तिरार नही है ।
*****
सबके दिलों पर राज़ करना जानता हूँ
मिट जाए रिशु का वो किरदार नही है ।


तारीख: 15.06.2017                                                        ऋषभ शर्मा रिशु






नीचे कमेंट करके रचनाकर को प्रोत्साहित कीजिये, आपका प्रोत्साहन ही लेखक की असली सफलता है