न जाने दिलों जां को ये क्या हुआ है

न जाने दिलों जां को ये क्या हुआ है
नही काम आती कोई अब दवा है ।

ये मौसम बहुत ही सुहाना हुआ है
बरसने को कोई अब चंचल घटा है ।

पिघल मैं गया हूँ बहुत ही शर्म से
किसी की नज़र ने मुझे जो छुआ है ।

वजह जानते गर मना लेते तुमको
मुझे क्या पता है हुई क्या खता है ।

खुदा की खुदाई पे अब शक न कोई
हुई जो मिरी हर मुकम्मल दुआ है ।


ये अलफ़ाज़ मेरे है तुमपे नज़र सब
किताबों में मैंने तुम्हे ही लिखा है ।

न रातें सुकूँ में न दिन में है चैना 
रिशु चाहतों का असर ये बुरा है ।


तारीख: 15.06.2017                                                        ऋषभ शर्मा रिशु






नीचे कमेंट करके रचनाकर को प्रोत्साहित कीजिये, आपका प्रोत्साहन ही लेखक की असली सफलता है