पुराने पड गये है शब्द

पुराने पड गए है  शब्द   नये ढूढँ रहा हूँ में
नौका बीच भॅवर मेरी किनारे ढूढँ रहा हूँ में

मुश्किल तो है मंजिल चलना बंद करूँ कैसे
चुनौती मिल गई उसमें चुनौती ढूढँ रहा हूँ में

लिख दूँ आग पन्ने पर पल में खाक हो जाए
समा ले आग की लपटें वो राख ढूढँ रहा हूँ में

शब्दों का जादूगर हूँ खेल दिखा के जाऊगाँ
सहेज उम्रभर रख ले वो किताब ढूढँ रहा हूँ में

जमाने से मिला "बेचैन" किसी से मिल नही पाया
अकेला था! अकेला हूँ! अब खुद को ढूढँ रहा हूँ में


तारीख: 18.06.2017                                                        रामकृष्ण शर्मा बेचैन






नीचे कमेंट करके रचनाकर को प्रोत्साहित कीजिये, आपका प्रोत्साहन ही लेखक की असली सफलता है