राजे दिल सब बताना चाहता हूँ

राजे दिल सब बताना चाहता हूँ
एक ग़ज़ल तुझ पर सुनाना चाहता हूँ ।
*****
ताव देकर मूछ पर मैं अपनी यारों
धाक दुश्मन पर जमाना चाहता हूँ ।
*****
ताख से ये घर नही जमते है हमको
फिर वही घर हो पुराना चाहता हूँ ।
*****
रात देखे ख्वाब जो तुम संग मैंने
ख्वाब वो सब मैं भुनाना चाहता हूँ ।
*****
दाँव पर मैं जो लगा हूँ उसके इश्क़ में 
हार खुद उसको जिताना चाहता हूँ ।
*****
चाँद कब तक दूर होगा चांदनी से
दूरियां अब ये घटाना चाहता हूँ ।
*****
वो डराते हमको क्या तलवार से है
जोर लेखन का दिखाना चाहता हूँ ।
*****
चल पड़ा जो चाह में तेरी तरफ मैं
राह के कांटे भुलाना चाहता हूँ ।


तारीख: 15.06.2017                                                        ऋषभ शर्मा रिशु






नीचे कमेंट करके रचनाकर को प्रोत्साहित कीजिये, आपका प्रोत्साहन ही लेखक की असली सफलता है