वो दिल का रिस्ता पुराना तुमसे निभाना है

वो दिल का रिस्ता पुराना तुमसे निभाना है
ये ग़मो का मौसम तो यूँ आना जाना है।।

वो ग़मो की खिर्जिया यूँ तब्बसुम में नाम तेरा
सब भर तेरी याद में ही खोया तेरा दीवाना है।।

तुझे देखकर बेसाख़्ता ऐसे ही मुस्कुराना है
यूँ ही सदियों से तुझसे रिस्ता निभाना है।।

खोया खोया दिल मेरा,चाँद को अब पाना है
तुझे देखू,देखू चाँद मेरा अब यही अफ़साना है।।

यूँ तेरा मुझसे कभी रूठना,सताना ओ हमनवा
तेरी इन अदावतो का ही अब ये दीवाना है।।

छुप छुप कर मुझे देखना,यूँ नज़रे मिला के चुराना 
दिल को नश्तर किये,कोई जख्म अब मिटाना है।।

सदका तेरे हुस्न का,सदका तेरे नूर का दिया हमने
मुहब्बत में अब तेरे दुनिया भुलाये बैठा ये दीवाना है।।

उरूज़ ए दिल को था इक तेरा ही आसरा जमाने में
वो तो अब तेरे मेरे दरमिंया पिंहा को अब निभाना है।।

ख़ाखे ज़माने को "आकिब"अब तो सिर्फ ये बताना है
जो तुम्हे दिल में बसाये"आकिब"उनका साथ निभाना है।।

 

उरूज़- उत्थान
पिंहा-नज़दीकियां
दरमिंया-बीच में


तारीख: 17.03.2018                                                        आकिब जावेद






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