ये जो दर्द मिला तेरे जाने से

 

ये जो दर्द मिला तेरे जाने से, मेरे हीं दिल का किराया है
कुछ वादे हैं,कई कसमें हैं,और एक ख़्वाब अभी बकाया है

अपने सपने,अपनी खुशियाँ,अपनी नीन्दें, और अपना मान
अपनी ग़ज़लें,अपनी नज़्में,अपने गीत और अपनी जान
सब कुछ अपना दिया था मैंने,याद तुम्हें भी होगा हीं
कभी आ कर देखो मेरे घर में,तुमने क्या लौटाया है
कुछ वादे हैं,कई कसमें हैं,और एक ख़्वाब अभी बकाया है

वो बाग जहां हम छुप छुप के अपनी शामें बिताते थे
बुढ़े बरगद का पेड़ जिसे हम, सारी बातें बताते थे
सबब तुम्हारे जाने का, मुझसे वो अक्सर पुछते हैं
कभी आ कर उन्हें भी समझा दो, मुझको जो समझाया है
कुछ वादे हैं,कई कसमें हैं,और एक ख़्वाब अभी बकाया है

मेरे कमरे से बरसातों का, हम दोनो लुत्फ़ उठाते थे
बादल के गरज से तुम मेरी, बाँहों मे छुप जाते थे
बादल अब भी आ जाते हैं, कभी कभी पर खफ़ा खफ़ा से
  मेरा अपना था जो कमरा कभी,आज लगता कितना पराया है
कुछ वादे हैं,कई कसमें हैं,और एक ख़्वाब अभी बकाया है
ये जो दर्द मिला तेरे जाने से, मेरे हीं दिल का किराया है
कुछ वादे हैं,कई कसमें हैं,और एक ख़्वाब अभी बकाया है


तारीख: 05.08.2017                                                        प्रमोद राजपुत






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