जल गया रावण अहंकार रह गया

जल गया रावण अहंकार रह गया
फ़िर एक बार राम लाचार रह गया ।


मोह, माया ,क्रोध,वासना और लालच
अंदर आदमी के जिंदा विकार रह गया ।


आचरण में इंसानियत और सच्चाई
बन के फ़कत आज विचार रह गया ।


शैतान शर्मिन्दा है हरकतों पे हमारी
हो के सादगी का वो शिकार रह गया ।


फ़िर न होश में आ सका ये ज़माना
मानसिक रूप से जो विमार रह गया ।


कोई काम न आई तेरी सब कोशिशें
अजय तू आज तक बेकार रह गया ।


तारीख: 01.11.2019                                                        अजय प्रसाद






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