नई पीढ़ी से उम्मीदें

नई पीढ़ी से उम्मीदें तो है पर खास नही 
जेहन से जो गाँधी,नेहरु या सुभाष नही ।

खुदगर्ज़ ख्याल,बेतरतीब बिखरे हुए बाल 
तन पे तहजीब को सँवारते लिबास नही ।

बे लगाम तक़नीक़, और बदहबास तरक्की 
बेशुमार ख्वहिशों कि है बूझती प्यास नही ।

न बुजुर्गो की इज्जत है ,न रिश्तों हिफाजत 
पुरानी चीजें अब आती इनको रास नही।

क्या कहें अजय अब इस दौरे बदनसीब को 
अपनी तबाही का जिसे ज़रा एहसास नही ।


तारीख: 18.07.2019                                                        अजय प्रसाद






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