तु रख अपने पास

रिसालों के लिए जो है कायदे कानून तु रख अपने पास 
नये रचनाकारों को ठुकराने का जूनून  तु रख अपने पास।

नही चाहिए मुझे तेरी रहमत ऐ खुदा हद से ज्यादा 
बाकी, दे कर मेरे हक़ की दो रोटी-ए-जून तु रख अपने पास ।

मुझे लिखनी है गज़ल तो मै लिखूंगा अपने मिज़ाज से ही 
मतला,मकता,रदीफ़ काफिया ,बहरे कानून तु रख अपने पास।

बस इतना बता कि मेरी मुफलिसी महफूज़ है ना मुस्तकबिल मे ?
फिर चाहे जो भी लिखा हो,तेरा ये मज़मून तु रख अपने पास ।

मुझको आने लगा है मज़ा अपनी गुरबत,बेचैनी ओ बदहवासी में 
इज्जत,दौलत,मुहब्बत,शोहरत,दिलेसुकून तु रख अपने पास ।


तारीख: 18.07.2019                                                        अजय प्रसाद






नीचे कमेंट करके रचनाकर को प्रोत्साहित कीजिये, आपका प्रोत्साहन ही लेखक की असली सफलता है