ये और बात है मुझ को तेरी कमी है


ये और बात है मुझ को तेरी कमी है
मगर तेरे बगैर भी ये दुनिया हसीं है ।


क्यूँ मैं शिकवा करूँ तेरी जुदाई का
तेरी खुशी में ही तो मेरी भी खुशी है ।


जब इज़हार ही नहीं तो, इकरार क्या
प्यार में दोनो तरफ़ बस खामोशी है ।


दिल की बात रही दिल में ही महफ़ूज
दोनो की अपनी-अपनी ही मज़बूरी है ।


मिलता नहीं है मुझको आराम जहां में
मौत के साये पल रही मेरी ज़िंदगी है


फ़िर न बसा इस दिल में कोई तेरे बाद
अजय शायद इसे ही कहते बंदगी है ।


तारीख: 01.11.2019                                                        अजय प्रसाद






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