हर रोज़-प्रीतिभोज


                 शादी-ब्याह हो या, बर्थडे पार्टी, रिटायरमेंट या फिर अन्य कोई भोजनात्मक आयोजन हम हर ऐसे अवसर पर हमारे प्रियजनों की प्रीतिभोज से झड़प करवाने की परंपरा रूपी हथकड़ी से बंधे है। भजन से पहले भोजन और भजन के बाद फिर भोजन, हमारी भोजन सत्ता की गहरी जड़ो की राष्ट्रभाषा में चुगली करता है।

 

शादियों के सीजन में प्रीतिभोज का प्रकोप अपने पूरे शबाब पर होता है। प्रीतिभोज में आपकी प्रीति लिंक ना होने पर भी आपको घटनास्थल अर्थात प्रीतिभोज  पर पहुँचना होता है ताकि आपसी रिश्तों में  गर्माहट बिना माइक्रोवेव के बनी रहे। कई  "भोजनासुर" तो हर सीज़न में संभावित और संदिग्ध प्रीतिभोज की सूची बनाकर ही तदनानुसार ही घर का राशन क्रय करते है। ज़रूरत से ज़्यादा मिलनसार लोग तो अपने शहर में होने वाले हर प्रीतिभोज मे सेंध लगाकर अपने घर मे राशन की आवक को रुपये की तरह न्यूनतम स्तर पर पहुँचा देते है। हर प्रीतिभोज के दाने-दाने पर ये बिना कागज़-कलम के अपना नाम और पता दोनो लिख देते है।

किसी भी आयोजक के लिए प्रीतिभोज के लिए स्थान बुक करना मैच फिक्स करने से भी मुश्किल होता है। 6 माह-1साल भर पहले से  प्रीतिभोज के आयोजक, शहर के हर पार्क और कम्युनिटी हॉल पर लाइन मारना शुरू कर देते है ताकि किसी एक के साथ नियत तिथी को डेट फिक्स कर सके। रोज़ होशियारी की चाशनी का शैम्पू करने वाले कुछ लोग तो ऐसी जगह प्रीतिभोज रखते है कि जहाँ ज़्यादातर रिश्तेदार पहुँच कर अपनी कदम और राय ना रख पाए।

प्रीतिभोज में सबसे बड़ी चुनौती स्वादिष्ट भोजन को अपनी प्लेट में ज़ब्त करने की होती है। बुफ़े में दाल मखनी लेने के बाद गुलाबजामुन तक पहुँचने के लिए 6 लेन फ्लाईओवर की व्यवस्था होनी चाहिए ताकि भोजनप्रिय जनता, बिना किसी टक्कर के अपने पसंदीदा भोजन के पास खुद को पार्क कर सके। हाथ मे प्लेट लिए एक काउंटर से दूसरे काउंटर तक सफलतापूर्वक पहुँचने के लिए व्यक्ति की नसों में, मुसीबतों से लड़ने का साहस और जज़्बा अच्छे से मिक्सर मे पीस कर भरा हुआ होना चाहिए तभी वह हर काउंटर पर, हर डिश को काउंट कर अपनी फतेह का लेबल चस्पा कर सकता है। 

पहले चुनावो मे जिस तरह से बूथ कैप्चर किए जाते थे उसी तरह  से प्रीतिभोज में दबंगो द्वारा काउंटर कैप्चर कर लिए जाते है। जो काउंटर कैप्चर कर लिए जाते है वहाँ से आम आदमी का अपनी प्लेट में मिष्ठान डाल देना परमवीर चक्र योग्य वीरता का काम है। दबंगो द्वारा कैप्चर किए गए काउंटर को ठीक उसी तरह से घेर कर रखा जाता है जैसे एसपीजी गार्ड्स द्वारा प्रधानमंत्री घिरे रहते है। कैप्चर किये गए काउंटर के सारे पकवान ,दबंगो के रिश्तेदारों की प्लेट्स मे डिस्को-कैबरे करते हुए उदरस्थ होकर मस्त होते है।

प्रीतिभोज में पानी का काउंटर उसी तरीक़े से छुपा दिया जाता है जिस तरीक़े से शादी में साली समुदाय से ताल्लुक रखने वाली स्त्रियां, जीजा कौम मे गुज़र-बसर करने वाले निरीह प्राणियों के जूते छुपा देती है। कभी कभी रेगिस्तान में पानी ढूंढना फिर भी आसान होता है लेकिन किसी पार्टी में पानी के काउंटर को खोजना सच्चा प्यार खोजने से भी मुश्किल है। अगर कोई व्यक्ति ,भलमनसाहत के वायरस से  पीड़ित होकर पानी के काउंटर का पता उगल भी दे तो भी वहाँ तक सही सलामत पहुँचकर अपनी प्यास का गठबंधन पानी से करवा देना बहुत मुश्किल होता है। कई पैसे वाले मेहमान, अपने साथ डिटेक्टिव एजेंसी के जासूस भी अपने सामान के साथ लेकर चलते है ताकि वो मेहमान के खाना खाने से पहले ही छुपे हुए पानी के काउंटर पर छापा मारकर सही समय पर पानी से मुठभेड़ करवा सके।

निमंत्रित किए गए मेहमान अपने साथ भीषण शुभकामनाओ के साथ साथ नकद वाले लिफाफे से भी आयोजन का भी कद कई फ़ीट ऊँचा कर देते है। बिना लिफाफे के शुभकामनाओ ठीक उसी तरह होती है जैसे म्यूट किया हुआ टिक-टोक वीडियो। लिफाफे से गलबहिया करती हुई शुभकामनाए , मेज़बान के शरीर को जल्द ही घेर लेती है। मेज़बान के साथ मेहमान के राजनैतिक और कूटनीतिक संबंध कैसे रहेंगे यह लिफाफे के वजन पर निर्भर करता है। शादी या अन्य आयोजन में दिया जाने वाला मेहमान द्वारा दिया जाने वाला लिफाफा दरअसल बिना आवेश में आए, अच्छे संबंधों मे किया गया निवेश है।

प्रीतिभोज पर किया गया खर्च,हमारी संस्कृति का अटूट हिस्सा है जो अगर टूट भी गया तो लोग उसे अपनी भूख के फेविकोल से फिर जोड़ लेंगे। अब समय आ गया है कि सरकार प्रीतिभोज की बढ़ती हुई महामारी को देखते हुए जनहित में इसका राष्ट्रीयकरण कर दे। प्रीतिभोज का राष्ट्रीकरण होने से अन्य राष्ट्रीयकृत वस्तुओ की तरह इसे भी ठिकाने लगाने में आमजन को संवैधानिक सहूलियत रहेगी।

 


तारीख: 10.09.2019                                                        अमित शर्मा 






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