लतखोर होली

मैं आज अपने कमरे में बैठा कुछ लिखने की सोच ही रहा था कि अचानक मेरे एक दोस्त अंगद बाबू पके आम की तरह टपक पड़े, आते ही उन्होंने बड़े गर्मज़ोशी के साथ दण्ड-प्रणाम किया तो मैंने भी औपचारिकतावश उनका हाल-चाल पूछ लिया! दो महीने बाद होली का त्योहार आने वाला था, सो मैंने होली की तैयारी जानना चाहा! होली का नाम सुनते ही बेचारे सहम गए, मुझे यह समझते देर न लगी कि इन्हें पिछले साल की होली का दर्द याद आ गया! मैंने सोचा चलो आज इसे ही लिख लिया जाए, दरअसल यह किस्सा कुछ इस प्रकार है:-
पिछले साल सुबह का वक्त था मैंने प्रण कर लिया था कि यह होली में सादगी से मनाऊंगा लेकिन हमारे मित्र अंगद बाबू को तो पीने की सनक सवार थी, और इन्हें कुछ यादगार होली चाहिए था! अतः सुबह-सुबह ही इन्होंने दो-तीन बोतल शराब गटक लिया और आवारा साँड़ की तरह इधर-उधर उधम मचाने लगे! कभी सियार की तरह जोर-जोर से चिल्लाते तो कभी बरसाती मेढ़क की तरह उछलते-कूदते और किसी का दरवाजा पिटते!


इसी प्रकार झूमते हुए अंगद बाबू मकान के छत पर जा पहुंचे,पास ही दूसरे मकान की छत पर भी होली का विशेष कार्यक्रम के तौर पर नाच-गाना चल रहा था वहां कुछ आस-पड़ोस की कन्याएँ भी नाच-गान का आनंद ले रही थी! इन कन्याओं को देखते ही हमारे अंगद बाबू की जवानी समंदर के लहरों की भांति हिचकोले खाने लगी, एक तो अपनी बीवी की याद दूसरा शराब का उन्माद! बस फिर क्या था अंगद बाबू ने न आव देखा न ताव एक औरत को आँख मार डाली, वह भी एक बार नहीं पूरे पाँच बार! वो तो वो इन्होंने फ्लाइंग कीस तक दे मारी, वह औरत गुस्से से लाल-पीली होती हुई अपने कमरे में चली गई! अब हमारे अंगद बाबू की खुशी का ठिकाना नहीं था, वह इस कद़र खुश थे जैसे पहली बरसात में कोई मेढ़क खुश होता है! आख़िर हो भी क्यों न उन्होंने दूसरे की बीवी को आँख जो मार डाली थी और यह कार्य कोई असभ्य व्यक्ति ही कर सकता है!

ततपश्चात वह दौड़ते हुए अपने कमरे में आए और पूरी वैल्यूम के साथ DJ बजाने और नाचने लगे! बेचारे अंगद बाबू, आने वाले शनि की साढ़ेसाती से अनजान DJ की धुन पर थिरक रहे थे कि अचानक वह औरत अपने साथ चार मुस्टंडों को लेकर दरवाजे पर आ धमकी! जैसे ही इस औरत ने दरवाजा खोला सामने नृत्य-मुद्रा में अंगद बाबू ही नज़र आ गए, अब चार हट्टे-कठ्ठे पहलवानों के साथ उस औरत को देखते ही इनका नशा और DJ का डान्स दोनों हवा मिठाई की तरह उड़ गया! अब अंगद बाबू कुछ हाल-ए-दिल बयां कर पाते कि उससे पहले उन चारों मुस्टंडों ने इन्हें ऐसे झपट्टा मार कर दबोचा जैसे कोई उड़ती हुई चील मुर्गी के चूजों को दबोचती है, अब उन चारों पहलवानों ने अंगद बाबू को खींचकर कमरे से बाहर निकालना शुरू किया लेकिन हमारे अंगद बाबू अपने नाम के अनुरुप बालीपुत्र अंगद की तरह पूरी ताकत से अपने पैर जमाए हुए थे और टस से मस होने का नाम नहीं ले रहे थे! कि तब तक एक पहलवान ने अंगद बाबू को पीछे से एक जोरदार लात जमा दिया, अब इनकी सारी ताकत शून्य हो गई और ये मुँह के बल गीर गये! तभी दूसरे पहलवान ने इनकी फ्रंट के लम्बे-लम्बे बाल को पकड़ कर ऊपर की ओर खींचा, अब बेचारे अंगद बाबू दर्द से बिलबिलाते और दांत भिंचते हुए छटपटा कर खड़े हो गए!

फिर क्या था, उन चारों जल्लादों ने अंगद बाबू को कुछ इस तरह से खींचना शुरु किया जैसे कोई कसाई बकरे को हलाल करने के लिए जबरदस्ती खींच कर ले जाता है,दस-बारह कदम दूर ले जाकर उन चारों नें हमारे अंगद बाबू को कपड़ों की गठ्ठर के भांति ऊपर से खूब उठा-उठाकर पटका और फिर उन पर लात घूँसों की तड़ातड़ मूसलधार बारिश कर दी! हमारे अंगद बाबू चाहते हुए भी चिल्ला नहीं पा रहे थे, वह ज्यों ही चिल्लाने के लिए मुंह खोलते एक जोरदार घूँसा उनके मुंह पर आ लगता और उनकी चीख वापस उनके हलक में पुनः घुस जाती! यह ट्रेलर करीब 10 -15 मिनट तक चलता रहा! लात-घूँसों की शोर से वहाँ तुरंत लोगों की भीड़ एकत्र हो गई और उस राक्षसी औरत को किसी तरह समझा बुझाकर उसके चंगुल से हमारे अधमरे अंगद बाबू को छुड़ाया गया! लेकिन उनके धारदार हमलों से अंगद बाबू का हुलिया पिचके हुए डिब्बे की तरह हो गया था, साथ ही यह होली भी यादगार हो चुका था!
 


तारीख: 12.08.2017                                                        कुमार करन मस्ताना






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