आधुनिकता का सुख

आज वर्षो बाद कोई महात्मा जो हिमालय की किसी चोटी पर तपस्यारत थे आज वापस आ रहे है ,चारो ओर इस बात का शोर है ,लोग उनके एक दर्शन मात्र को लालायित है, सुना है बड़ी सिद्धि प्राप्त कर ली है उन्होंने। जब वो करीब अट्ठारह बरस के थे तभी चले गए थे तपस्या करने आज साठ बरस के हो गए है पर चेहरे पर अभी भी तेज है, अंगो में फुर्ती है बाल दाढ़ी बढ़ी हुइ जटा किये हुए है। शहर के बड़े बड़े उद्योगपतियों का ताँता लगा हुआ है सब उनका स्वागत करने और उनके दर्शन और आशीर्वाद के लिए प्रतीक्षारत है, उन्हें पहले हवाईजहाज से फिर कार से लाया जा रहा है, ये हवाईजहाज, ये कार उन्हें भगवन राम के पुष्पक विमान जैसी ही प्रतीत हो रही है जो मन की गति से आकाश में और जमीं पर चल रही है और बड़ी आरामदायक भी है ,स्वागत का सिलसिला पूरा हुआ ,उनका वहा  के सबसे अच्छे होटल में रुकने का प्रबंध हुआ। 

छप्पनो भोग लगे है तरह तरह के व्यंजन जो शायद स्वर्ग में देवताओ को ही प्राप्त होते होंगे ,महात्मा जी ने भोजन किया और अपने शयनकक्ष में आराम करने चले गए , एक नौकर उनके पास आता है है और कहता है महात्मा जी किसी प्रकार की कोई भी जरुरत हो तो आप बस यह बटन दबा दीजियेगा मै उपस्थित हो जाऊंगा ,यह नौकर उन्हें अलादीन जैसा लग रहा है जो चिराग घिसते ही प्रकट हो जाता था।

महात्मा जी कमरे में नजर दौड़ा रहे है उन्हें ऐसे उपकरण दिख रहे है जो उन्हें अचंभित कर रहे है ,कमरे में एयर कंडीशनर लगा हुआ है जो सुविधानुसार कमरे का तापमान ठंडा या गर्म बनाये रखेगा ,एयर सर्क्युलेटर लगा हुआ है जो कमरे में वायु के प्रवाह को बनाये रखेगा ,एक वाटर मशीन लगा है वो जो इच्छानुसार ठंडा या गर्म पानी दे रहा है कुछ इलेक्ट्रिक लाइट्स लगी है जो प्रकाश दे रही है ,ये सारे उपकरण उन्हें ऐसे प्रतीत हो रहे है जैसे वायु ,जल ,ताप सब अब मनुष्य के अधिकार में हो गए है , उन्हें ये सब अधिकार और सुविधाएं ऐसी लग रही है जो कभी त्रेतायुग या द्वापरयुग में कठिन तपस्या से ही प्राप्त किये जा सकते थे। कमरे में एक टेलीविजन लगा हुआ है जो अपने कमरे में बैठे देश दुनिया में हो रही घटनाओ का सीधा प्रसारण ऐसे दिखा रहा है जैसे मानो महाभारत के संजय की दृष्टि प्राप्त हो इन्हे। यह सब देख महात्मा जी इस सोच में पड़े हुए है ये सारे व्यंजन ये सारी सुख सुविधाएं जो स्वर्ग में सिर्फ देवताओ को प्राप्त होती है वो यहा उपलब्ध है कहीं ये स्वर्ग ही तो नहीं।


तारीख: 19.09.2017                                                        शुभम सिंह






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