ज़रूरत

 

 उस रेल दुर्घटना में बहुत सारे लोग मर चुके थे, लेकिन उसमें ज़रा सी जान अभी भी बची थी। वह पटरियों पर तड़प रहा था कि एक आदमी दिखा। उसे देखकर वह पूरी ताकत लगा कर चिल्लाया, "बचाओ.... बsचाओ...."

आदमी उसके पास आया और पूछा, "तुम ज़िंदा हो?"

वह गहरी-गहरी साँसे लेने लगा।

"अरे! तो फिर मेरे किस काम के?"

कहकर उस आदमी ने अपने साथ आये कैमरामैन को इशारा किया और उसने कैमरा दूसरी तरफ घुमा दिया।


तारीख: 07.09.2019                                                        डॉ. चंद्रेश कुमार छतलानी






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