आज हमको अपने आप पर रोना आया

आज हमको अपने आप पर रोना आया !
दिल में थे जिसके अरमां पर वो ना आया !

जिसे खो दिया मैंने भीड़ भरी राहों में,,,,,,,
ढूढ़ती रही जिसको शय की पनाहों में,,,,,,,
खोजूँ जिसको जहां दर जहां वो ना आया...
आज हमको अपने आप पर....................

गया वो कहाँ जादू आँखों में जगा के,,,,,,,,
आया ना क्यूँ अब तक सपने दिखा के,,,,,
मेरी यादों में जो है समाया वो ना आया......
आज हमको अपने आप पर....................

फूलों से पूछा पंछियों को गुहार लगाई,,,
तारों से पूछा चाँद को आवाज़ लगाई,,,,,
पता करती रही जिसका वो ना आया.........
आज हमको अपने आप पर....................

सपनों में आके जो नींद से जगाता रहा,,,
सोये-२ दिल मेरा जिसको पुकारता रहा,,,
मेरे ख़्यालों में जो है बसा वो ना आया.......
आज हमको अपने आप पर....................


तारीख: 18.08.2017                                                        दिनेश एल० जैहिंद






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