ए ज़िन्दगी कुछ पल उधार दे दे

ए ज़िन्दगी कुछ पल उधार दे दे
छोड़ कांटे फूलों का हार दे दे ।
बोझ सी ज़िन्दगी ये कटती नही
श्याह काली रात है छटती नही ।

रौशनी की उम्मीद में फिर रहा हूँ
जला खुद को ही मैं जी रहा हूँ ।
हंसी होंठो पे है पर दिल में कई गम हैं
और कितना देगा गम इतने क्या कम हैं ।

नींद छूटी चैन खोया ख़ुशी जानता नही
गया मैं हार फिर भी हार मानता नही ।
हो मुमकिन तो नियति में सुधार दे दे
वरना मेरी तस्वीर पर एक हार दे दे ।


तारीख: 18.06.2017                                                        ऋषभ शर्मा रिशु






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