भारत-दुर्दशा

उस कलाम के देश में धर्म की ठेलम ठेल ,
गीता साथी कुरान की जिसने रची थी रेल ....

राज्यों के बँटवारे की लगी हुई है सेल ,
अपने देश की दुर्दशा देखो भाई पटेल ....

शास्त्री तेरे देश में कृषक बने हैं बैल ,
उद्योगपति शासक हुए पीते पैसा तेल ....

भीमराव तेरे देश में आरक्षण बना चुड़ैल ,
अमीर और अमीर हुए निर्धन रहा है झेल ....

भगत सिंह के देश में राष्ट्रद्रोह का मैल ,
सरकारें मुर्दा हुईं पुलिस प्रशासन फेल ....

गाँधी के इस देश में प्रेम गया अब जेल ,
मारो काटो घर जलाओ जारी खूनी खेल ...


तारीख: 10.06.2017                                                        शशांक तिवारी






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