भूतकाल के संसद के नेता

आज देश की संसद देखो घिरी हुई हे चोरो से
बिन वर्षा के मेंढक और कागज के झूठे मोरो से //

बुलेटप्रूफ गाड़ी में बैठकर ये संसद जाते हैं
देशके प्रहरी सीमा पर बिन रोटी के मर जाते हैं  //

इनको आदत पड़ी हुई है, ऐसी में सोजाने की
तैलफूलेल लगाकर के सावेर में रोज नहाने की  //

डिस्को मैं जाकर के यारों शाम में मौज उड़ाते हैं
गरीबो के हाथों से रोटी छीन के, खुद बिरयानी खातें हैं  //

सफेदपोश नेता बनकर ये सीधा रूप दिखते हैं
ये तो इतने जहरी हैं की नागों को खाजाते हैं  //

पांच वर्ष के लिए आते हैं, केवल नोट कमाने को
गरीव और पिछडो के ऊपर केवल वोट बनाने को //

एकबार इनसे पूंछो आज़ादी कैसे आयी है
याद करो उन वीरो की जिन्होंने अपनी जान गवाई है  //

वीर सावरकर, तात्या टोपे ने अपनी जान लगाई थी
राणा प्रताप ने जंगल में जा घास की रोटी खाई थी //

एक घंटे भी आज तुम धूप मैं खड़े नहीं हो पाओगे
ऐसा मौका मिला अगर तो सोलह चक्कर खोयोगे //

आज तुम्हे तो होड़ लगी है अपने महल बनाने की
जनता के पैसे को देखो लुटलूट कर खाने की  //

वीर क्रांतिकारियों की तुमको याद न बिलकुल आती है
आज केवल है पद और पैसा, झूठे पोते नाती हैं  //

कुछ याद करो उन लोगो को जिनने अपने लहू बहाया था
दिनरात मेहनत करके तुम्हे कुर्सी तक पहुँचाया था


तारीख: 23.06.2019                                                        सुनील शर्मा






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