चंद्रदेव

कल रात देखा जो उसे झरोखे से 
हाले दिल बयां कर दिया उस से  
तराशे हुए पत्थर से चमकते हो 
हे चन्द्रदेव ! तुम कितने सुंदर दिखते हो

छोटे छोटे तारों के बीच , बड़े बड़े दिखते हो
हे चन्द्रदेव ! तुम कितने सुंदर दिखते हो
काले काले मेघों से जब, लुक्का छिप्पी खेलते हो 
हे चन्द्रदेव ! तुम कितने सुंदर दिखते हो

कभी आधे अधूरे , कभी पूरे पूरे दमकते हो 
हे चन्द्रदेव ! तुम कितने सुंदर दिखते हो 
काली अमावस की रात में ,
तुम्हारा घर बिन बिंदिया की दुल्हन लगता है
उसका हर श्रृंगार अधूरा लगता है 
मैं राह देखूंगी तुम्हारी उस पूर्णिमा की बेला में 
जब तुम हे चन्द्रदेव ! सबसे सुंदर दिखते हो |


तारीख: 06.06.2017                                                        निधि सिंघल






नीचे कमेंट करके रचनाकर को प्रोत्साहित कीजिये, आपका प्रोत्साहन ही लेखक की असली सफलता है