दहन

 

मौसम है सर्द और जरूरतें हैं मेरी कई
तो कुछ तो जलाना होगा
हाथ सेंकने के लिए


गरीब कहते हैं लोग मुझे
आज नसीब न हुई जलावन तो
थोड़ा सा खुद को जलाकर ही गर्म रख लूँगा
खुद को।


खुद को?
 


तारीख: 18.08.2017                                                        अमर परमार






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