जब हम बदल जाते हैं

जब चलते-चलते हमारे मंजिले-मुकाम बदल जाते हैं  ,
जब याद कर पुराने सपने हम कशमकश में पड़ जाते हैं ,
जब हमारे आरज़ू, हमारे अरमां बदल जाते हैं ,
हम बदल जाते हैं जब हमारे समा बदल जाते हैं ।

जब तस्वीर देखकर यारों की याद उनके नामों को करते हैं ,
और फिर कुछ यादों में उलझकर मन ही मन हम हँसतें हैं ।
जब हमारे साथ,  हमारे  हमराज़ बदल जाए ,
हम बदल जाते हैं जब हमारे  परवाज़ बदल जाते हैं ।

जब भरमाई सी बारिश की बूंदों पर हम, यादों की पुलिया बांधते हैं ,
जब रातों की रुनझुन में हम , तारों की राह ताकते हैं ,
जब हमारी  बात, हमारे जज़्बात बदल जाते हैं,
हम बदल जाते हैं जब हमारे हालात बदल जाते हैं ।


तारीख: 06.06.2017                                                        जय कुमार मिश्रा






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