जज़्बात

 

कुछ बोल जज़्बात पे लिखता हूँ,

कुछ बोल जज़्बात से कहता हूँ ।

 

जज़्बात जनम से होते हैं ,

जज़्बात से बन्धी है ये सृष्टि,

ये चाल चलन इस दुनिया के,

करते हैं इस सच की पुष्टि ।

 

हर जीव जज़्बाती होता है,

जज़्बातों में बहता रहता है,

करना चाहता कुछ और मगर,

कुछ और ही करता रहता है ।

 

करने की बात तो छोड़ो तुम,

कहने से भी घबराता है,

कहना चाहता कुछ और मगर,

कुछ और ही कहता रहता है ।

 

जज़्बातों के चलते ही चिड़िया,

चोग चुगाए बच्चों को,

ख़ुद भूखी रहे दिन भर चाहे,

आँच ना आने दे बच्चों को ।

 

अच्छे बुरे सब कामों में,

जज़्बातों का ताना बाना है,

अपनी अपनी समझ है प्यारे,

जो बोया सो पाना है ।

 

लोग अलग हो सकते हैं ,

जज़्बात अलग नहीं हो सकते,

विश्वास अलग हो सकते हैं ,

करतार अलग नहीं हो सकते ।

 

जज़्बात ख़ुदा की देनी हैं ,

जज़्बात से दुनिया चलती है ,

जज़्बात इबादत बन जाते,

अगर इनपे आँख पैनी है ।

 

परख परख जज़्बातों को,

बुद्ध जैसे बोधि हुए,

समझ समझ जज़्बातों को,

महावीर जैसे जैनी हुए ।

 

जज़्बात जीवन के वो पन्ने,

जो प्रायः नासमझी में लिखे जाते,

सूझवान लिख सके अगर कोई,

तो बुद्ध मुनि उसमें आते ।

 

जज़्बातों पे लिख देने की,

अनुराग ने कोशिश की पूरी,

जज़्बातों के वश होकर ही,

शायद कोशिश रही अधूरी।

 

कुछ बोल जज़्बात पे लिखता हूँ,

कुछ बोल जज़्बात से कहता हूँ ।


तारीख: 09.08.2019                                                        अनुराग






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