जीना चाहती हूँ


बादलों के बरसने से पहले 
सूरज की तपती धूप को 
गहरी होती साँझों को 
हवा की सरसराहट को
पक्षियों के मधुर संगीत को 
चुनना चाहती हूँ 
क्योंकि जीना चाहती हूँ 
मरने से पहले 
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निराश अंधेरों में 
काले गहरे धब्बों को 
जुगनूओ के सहारे 
मिटाना चाहती हूँ 
धूल भरी सड़कों  पर 
अकेले चलना चाहती हूँ 
क्योंकि जीना चाहती हूँ 
मरने से पहले 
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उस रेस में दौड़ना चाहती हूँ 
जिसमें कल हारी थी  
फिर से हारना चाहती हूँ 
हर हार से सिखना चाहती हूँ 
मुरझाने से पहले 
खिलना चाहती हूँ 
क्योंकि जीना चाहती हूँ 
मरने से पहले 
 


तारीख: 16.07.2017                                                        आरती






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