काश...तुम होती

काश....तुम होती!
मैं दिया तुम बाती बनती,
मेरे साथ रहकर मेरी साथी बनती.
मेरी धड़कन की धुन तेरे सीने में बजती,
बिन कहे तुम मेरे हालात समझती.
काश तुम होती!


मेरे दर्दों में तुम मेरी आह बनती,
मेरे गीतों पे तुम मेरी वाह बनती.
मेरी गजलों का तुम मिसरा बनती,
उस मंजिल की तुम राह बनती.
काश तुम होती!


तेरी एक मुस्कान पर मैं जान लुटाता,
तेरी हर अदा पर मैं शायरी बनाता.
तेरे जलवों से में अपनी शायरी सजाता,
अपनी तारीफ मेरी ग़ज़लों में पढ़ कर तुम खुद पर इतराती.
काश तुम होती!


तेरी साँसे मेरे जीवन में जान भरती,
मेरे लिए तुम सोलह श्रृंगार करती.
मेरे प्यार में तुम सजती संवरती,
अपनी नादानियों से अंजान बनतीं.
तेरी पायल मेरी बेसुरी ज़िन्दगी में अपनी झंकार भरती.
काश तुम होती!

 


तारीख: 27.08.2017                                                        निशांत मिश्रा शंकर






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