पहली बारिश

ये मिट्टी की सोंधी  खुशबू , ये बूँदों की चंचल चंचल रिमझिम,
ये मंद समीर की आवाज़ें,  ये चिड़ियों का उड़के जाना,
इतना प्यारा ना लगा कभी, यूँ पहली बारिश का आना।  

बचपन मे शायद शायद हम भी यूँ बारिश का मज़ा उड़ाते थे,
वो चकरी,  वो कागज़ की नाव, बारिश गाने गाते थे,
कुछ याद नही है सही सही, पर जब भीग के घर पे आते थे,
माँ की डांट के साथ आलू के भजिये खाते थे,
शायद इतना ही  प्यारा था, वो पहली बारिश का आना। 
इतने सालों मे भूल गये थे, जैसे हम तो मुस्काना,
एहसास वही फ़िर जाग है, जिसे मुश्किल था शायद पाना,
इतना प्यारा ना लगा कभी, यूँ पहली बारिश का आना।  

क्यों आज फ़िर वो उमंग है, हैं रंग बिखरे जैसे सब ओर,
ऐसी कोई बात जगी दिल मे, है ये कैसा उसका आना,
हर फ़ूल महकता है,  जैसे तेरी ही ख़ुशबू से,
जैसे इस समीर ने तेरी ही महक बिखेरी है,
ये धुले झरोखें बारिश से, ये बहता सड़कों से पानी,
सब धुला धुला सा लगता है, इतना सुन्दर न लगा कभी,
कण कण जैसे पवित्र है, अनुभूति है ये क्या प्रेम की,
अब तक जैसे खोई थी मैं, पाकर तुमको सब कुछ जाना,
इतना प्यारा ना लगा कभी, यूँ पहली बारिश का आना। . 


तारीख: 06.06.2017                                                        पूजा शहादेव






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