प्रश्न 

 

है आजादी क्या‌ आजादी
जनता का जहां पर ध्यान नहीं
जो प्रश्न चिरंतर से हैं खड़े
उसका अबतक निर्वान नहीं ?

उस इन्द्रप्रस्थ का मान नहीं
नारी का जहां सम्मान नहीं
जहां कोख की हत्या होती हो
उस भूमि पर इंसान  नहीं ।

जिस शस्य श्यामला धरती पर
कोई मौत क्षुधा से हो जाए
उस राष्ट्र के सत्ताधीशों का
कोई मान नहीं सम्मान नहीं ।

जहां दिल के दरवाज़े से बड़ी
जाति की दीवारें खड़ी मिलें
जहां प्रेम की हत्या होती हो
कृष्णा का वहां गुणगान नहीं ।

जिस पतित पावनी गंगा को
अपवित्र कर दिया मानव ने
जो सभ्य बताता है खुद को
पर संस्कारों का ज्ञान नहीं ।

भगवान जहां पर बंट जाएं
मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारों में
धर्मों मज़हब के नाम जहां
खूं की नदियां बहती जाएं
उस भूमि के रज कण में अब
बसते‌ हैं कहीं भगवान नहीं ।।


तारीख: 23.08.2019                                                        प्रकाश कुमार






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