सबकुछ मेरा बन गए हो जब

सुनो जरा ,
कहीं मत जाना अब !
यूँ अकेला छोड़ के,ये प्यारा रिश्ता तोड़ के !
जी न पाउँगा मैं !
तुम मेरी आदत हो अब !

पल -पल की इबादत हो अब !
बिन तेरे जो लम्बी थी रातें ,
तन्हाई में कटती न थी काटे !
देख कैसे घट गयी है अब !
यूँ मेरे संग हाँ है तू जब !

अभी तक तो सिर्फ प्यार थे ,,
पर अब जिंदगी का सार हो !
मेरे तड़पते दिल की बहार हो !
बस कहीं मत जाना अब !
"सबकुछ" मेरा बन गए हो जब !


तारीख: 23.06.2017                                                        आदित्य प्रताप सिंह‬






नीचे कमेंट करके रचनाकर को प्रोत्साहित कीजिये, आपका प्रोत्साहन ही लेखक की असली सफलता है