समय और समझ

शान्ति की अनुभूति होती थी जिन शब्दों से
अब उन शब्दों का पर्याय ही जैसे कुछ और लगे। 
प्रेम किया जिससे वो तो मिला कुछ यूँ हमसे 
जैसे परिचित ने पहचान करायी हो किसी गैर से। 

समय का ये था खेल समझ ना सके जिसे हम समय तलक -२ 
या एक सपना जिसे हक़ीक़त समझ रहे थे समय तलक। 

प्रेम तपस्या कठिन बहुत है, सुना था हमने कभी कंही -२
पर तप ये ऐसा फल देगा पता नही था अभी तलक। 

सोचा की पाया हमने जग, ऐसी अप्रतिम अनुभूति थी -२ 
उत्सव ऐसा हुआ हृदय मे, जैसे आँचल मे भर मेरे नृत्य कर रहे सात धनक। 

उत्सव बस कुछ देर ही था, काले बादल यूं छाये फिर -२   
जैसे मुझ पर हसकर बोले, मूर्ख बने तुम अभी तलक। 

समझ समय तब आया सच मे, समझ सके ना देर तलक -२   
समय का ये था खेल समझ ना सके जिसे हम समय तलक। 


तारीख: 06.06.2017                                                        पूजा शहादेव






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