समय

 

वो जो बचपन में उड़ाई हमने,
जाने कब कैसे चुराई तुमने,
मै तो सारा आकाश दे दूंगा,
तुम वो मेरी पतंग लौटा दो|

फूल खिलते हैं हवा बहती हैं,
तितलियाँ रंग बुनती रहती हैं,
बरसों बरसों बसंत दे दूंगा,
तुम वो मेरी उमंग लौटा दो|

रूठ जाते थे मान जाते थे,
दूर जा-जा के लौट आते थे,
मेरी सारी ही फुरसतें ले लो,
वो मेरा साथ-संग लौटा दो|
 


तारीख: 03.08.2017                                                        राज हंस गुप्ता






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