तुझ जैसी सहेली

अनवद्य ख़्वाबों की, अनसूलझी पहेली
खोया अंतर्मन पाकर तुझ जैसी सहेली

अनुराग ईप्सित, कस्तुरिका सम महके
गोधूलिरंग विभूतित कंचनकाया बहके
काव्यात्मक कांतिमय, नशीली पलकें
अतिमंजुल कल्पित, ज्योतिर्मय दमके
तेजोदीप्त गांभीर्य, अकुलाहट भरे नैना
चितचोर घुंघराले केश, जगती सी रैना
अनवद्य ख़्वाबों की, अनसूलझी पहेली
खोया अंतर्मन पाकर तुझ जैसी सहेली

ज्यूं बजे किवदिंत अनुपम तारसप्तिका
संतृप्त ऐश्वर्यित उज्ज्वल पूनम चंद्रिका
अनहद कारूण्य, कलरव सम सुगढन
दावानल प्रलोकित, द्युति गाथा उगढन
फकीराना-मस्ती, फा़का़मस्ती-ऐ-खास
हो पनघट पर पनिहारिनों का चारुहास
अनवद्य ख़्वाबों की, अनसूलझी पहेली
खोया अंतर्मन पाकर तुझ जैसी सहेली

पथिक सम अतिमंजुल उत्कृष्ट गम्यता
चकमक पत्थर सम झंकृत ऊर्जस्विता
कल्पनातीत अमृतमय परिष्कृत तुष्टता
इंद्रियातीत इंदुमुख पर चमके चंचलता
निशब्द पतंग सम मनमोहक नृत्यकला
नश्तर सम तिखी, निर्द्वंद्व पावन चंचला
अनवद्य ख़्वाबों की, अनसूलझी पहेली
खोया अंतर्मन पाकर तुझ जैसी सहेली

उन्मत्त तिलिस्मी अलंकरणों की रवानी
अहसासों की आत्मश्लाघित कहानी
ख्वाहिशों के धुंधले से हो चूके कूटलेख
मचलती चाहतों के ऐंद्रजालिक सूलेख
अलौकिक दस्तूरों सी तारतम्‍यता लपेटे
नैसर्गिक सी त्रिकोणमितीय ताल समेटे
अनवद्य ख़्वाबों की, अनसूलझी पहेली
खोया अंतर्मन पाकर तुझ जैसी सहेली

चांचल्य प्रतीति, दिव्य निश्छल चिंगारी
भवदीय ज्यूँ, माँ की आँचल किलकारी
बस मिलन अभिलाषा, घूंघट में बांधे
प्रणम्य परिभाषा, है भँवर प्रत्यंचा साधे
चंदन आदृत वसंत मृदु कलिका गायत्री
पुष्पकाल ध्वलित, है मम अक्षत नक्षत्री
अनवद्य ख़्वाबों की, अनसूलझी पहेली
खोया अंतर्मन पाकर तुझ जैसी सहेली


तारीख: 04.07.2017                                                        उत्तम दिनोदिया






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