तुम संग सपने सलोने देखे

तुम संग सपने सलोने देखे सुख-दुख आते-जाते देखे
देखे हैं नयनों में आंसू होठ सदा मुस्काते देखे...
 
थक जाता है सूरज लड़ते-
लड़ते दिन से ढल जाता है
शाम की शीतल बांहें लेकर
चांद मेरे घर आ जाता है
कैसे भूलूं मैं वो गेसू जिनमें मगन सवेरे देखे
तुम संग सपन सलोने देखे, सुख-दुख आते जाते देखे...
 
रूप नहीं जीवन भर का
मन की सुंदरता साथ रहे
एक-दूजे बिना अधूरे हैं हम
बस से वादा याद रहे
मझधारों में भी तुम संग मैंने सदा किनारे देखे
तुम संग सपन सलोने देखे, सुख-दुख आते जाते देख...
 
बेशक मेरी धुन पर दुनिया
कल झूमेगी तुम देखोगी
गीत मेरे खुशबू बनकर घर-
घर महकेंगे तुम देखोगी
पर मंजिल तक पहुंचाने वाले पांव में मैंने छाले देखे
तुम संग सपन सलोने देखे, सुख-दुख आते जाते देखे.....


तारीख: 10.06.2017                                                        अभिषेक सहज






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