ऐ काश के

ऐ काश के वक़्त मुझे उसी मोड़ पे ले जाये,
जहाँ थे तुम मेरे नैनो में समाये,

पलकें कर बंद कैद कर लेना चाहूँ तुम्हे,
और जो खोलू पलकें तो भी सामने पाऊं तुम्हे,

ऐ काश फिर वही बरसात आज हो,
जहाँ हम तुम हमेशा साथ हो,
कन्धों पे तुम्हारे मेरे यह हाथ हो,
जहाँ धड़कते हो दिल एक दूजे के लिए,
जहाँ मानी हो कसमें,
साथ मरे हम,
साथ जियें,

जहाँ कटती थी रातें अगले दिन के इंतज़ार में,
जहाँ अकेले बैठे मुस्कुराते थे प्यार में ,

यह जो चंचल मृग नैन दाता ने तुम्हारी बनाई है,
डूबें रहे सदियों तक इनमे हम,
सागर जितनी इनमें गहराई है,

जाऊं वही,
देखूँ वही,
अक्स हो जहाँ तुम्हारा,
और कुछ नहीं,

तुम्हे जीत पाना,
जैसे चाँद हथेली पर घुमाना,

हाँ मैं जीत के भी हारा हूँ,
तुम बिन अधूरा हूँ बेसहारा हूँ,

ऐ काश के तुम उस वक़्त ठहर पाते,
तो इस बेरंग ज़िन्दगी में हम तुम रंग भर पाते,
उन वीरान सडकों पे चहल पहल कर पाते,
इस दुनिया के लिए मिसाल बन जाते,

साथ जीते और साथ ही मर जाते,

फिर इन ख्वाबों को रौंद न सकता था कोई,
पर अब इस टूटे दिल को जोड़ न सकता था कोई,

ऐ काश मुझे याद न आती ,

वो शर्माती मुस्कानें ..
वो इठलाती बाहें ...
वो गहरी निगाहें ..

जो इन् नैनों के मद भरे प्याले हैं..
ये कब से हमें संभाले हैं..
लेकिन अब इन यादों पे 
जमी वक़्त की धूल थी,
 ..
चाहा किसी को इतना मैंने,,
क्या यही मेरी भूल थी?

ऐ काश तुम्हे भी यह एहसास हो..
जब तुम्हारे भीतर मोहब्बत की प्यास हो  ..
कोई हमेशा के लिए हो जाये तुम्हारा,
ऐसी तुममे आस हो,

तुम्हे भी इश्क़ हो जाए ऐसी बेदिली मूरत से,
जो चाहे पाना तुम्हे सिर्फ तुम्हारी सूरत से,

याद तो तुम्हे भी आती होंगी,
वो रातें हमने इंतज़ार में जो काटी थी..
जहाँ में तुम्हारा हमसफ़र 
और तुम मेरी जीवनसाथी थी,..

वो  एक खट्टी लड़ाई लड़ना ..
वो एक मुस्कान से मेरा दिल भरना ..

ऐ काश के तुम्हे बातें सब याद होती,
तो आज यह आँखें नम न होती ,

देखो तुम रो रहा हूँ में,
देखो कैसे सब कुछ खो रहा हूँ में,

ऐ काश के मोहब्बतें इतनी आसान हो जाती,
की में थपकियाँ देता रहता तुम्हे रात भर,
और तुम मेरी गोद में सर रख के सो जाती


तारीख: 20.06.2017                                                        सूरज विजय सक्सेना






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