छोड़ चली है माँ

सारे घर की बालाएं ओढ़ चली है माँ 
झोलियाँ भर भर दुआएं छोड़ चली है माँ |

जो सारे रिश्ते नाते उससे मैंने सीखे थे 
देखो कैसे सारे नाते तोड़ चली है माँ |

जिस लाल चुनरी में मैं छुप छुप खेला करती थी
बिंदिया, लाली,नथुनी,झुमकीऔर वही लाल चुनरीया ओढ़ चली है माँ |

मुझको सदा दृढ़ बनाने वाली,धर्म परायणता बताने वाली,
शिष्टाचार्य सीखने वाली
सबसे हाँथ जोड़ चली है माँ |

छावप्रदायिनी, शीतला, अन्नपूर्णा, मंशापूर्णी 
विद्यादायी,करुणामयी, दुर्गारूपा, लक्ष्मी स्वरूपा मेरी माँ ||


तारीख: 16.11.2019                                                        विवेक द्विवेदी






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