दोस्ती

क्यूँ रूठा है मुझसे मेरे दोस्त
लड़ ले मुझसे,दे दे धक्का
चुपचाप बैठा घूर रहा क्यों
न थाम बांहे न पकड़ ऊँगली
न देख मुझे न सुन मुझे 
पर ऐसी नाराजगी न उँडेल।
अब लौट भी आ

क्या करू जो लौट आ,
क्या दे दूँ जो मान जा,
क्या बोलू जो मुस्कुरा,
कैसे जियूँ तेरे बिन बता,
मेरी सुनी साँसों को ,
मेरी बोझिल बातो को,
थोड़ा थोड़ा तो सहला ,
अब लौट भी आ ,

भूल जो भी हो गई मुझसे
माफ़ कर अब ना सता,
तेरे पैरों पे रखूँ  दू माथा
या आंसुओं से धो दू  रास्ता,
जो तू कह मंजूर करूँगी
लौट भी आ अब लौट भी आ,

आएगा ना


तारीख: 30.06.2017                                                        कृष्णा राठौर






नीचे कमेंट करके रचनाकर को प्रोत्साहित कीजिये, आपका प्रोत्साहन ही लेखक की असली सफलता है