गुरु और ज्ञान

मेरी चुप्पी मेरा सत्कार है
  न कोई तिरस्कार है
आपका मान है जो ध्यान है
उस ज्ञान को सम्मान है
 
हैं जो ख्यालों में बातें दूर की अगर
आएँगी कभी होंठो पे ऐतबार है मगर
सिर्फ गुरु नहीं वो आराध्या है
दिया ज्ञान उसका अबाध्य है
 
 ढूंढें कोई ज्ञान को चाहें कहीं
वो बस उससे ही साध्य है
गुरु ज्ञान का सम्बन्ध गहरा हर परिस्थिति में है
गुरु पूजनीय हर स्थिति में है

गुरु सं पद प्राप्त है उसको
दे शब्द का भी अर्थ जो हमको
फिर आपने दिया है प्रशांत सं ज्ञान
अब क्या दूं पद आपको

दूर की वेदना इस संसार की
दी चेतना इस चित्त की,
हे गुरु दिए तुम्हारे ज्ञान के
वर्णन हेतु कलम भी थक जाती है
बिना उस ज्ञान के अब भोर नहीं हो पाती है.
 


तारीख: 02.07.2017                                                        हेमलता शर्मा






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