हां मगर भुला रहा हूं

भूलना तो मुमकिन नही
हां मगर भुला रहा हूं।
कुछ छोटी बड़ी बातें
दिल से हटा रहा रहा हूँ
भुला रहा हूँ,
तुझसे मिली खताएं
वो जफाएं
वो तड़पाना तेरा
वो नजरें चुरा कर
छोड़ जाना तेरा
भूलना तो मुमकिन नही
हां मगर भुला रहा हूं।
कुछ अंधेरे उजालो की रातें
यादों से मिटा रहा हूँ
भुला रहा हूँ
तेरे दिए अश्क
वो बखशिस (भीख) की तनहाई
जिंदगी मेरी बंजर सा बनाना तेरा
वो उजाड़ कर दुनिया मेरी
खो जाना तेरा
भूलना तो मुमकिन नही
हां मगर भुला रहा हूं।


तारीख: 19.09.2017                                                        सारा ख़ान






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