जो अब नींद नहीं इन आँखों में

जो अब नींद नहीं इन आँखों में ,
की अब सो ना पायेंगे ...

छिपकर चलेंगे जुगनुओ से मिलने ,
और तारों को जगायेंगे ...

झींगुरों के शोर से ,
ओस की बूंदों संग लड़ जायेंगे ..

रात को यूँ हीं तकते तकते ,
सहर होने तक सो जाएंगे 


तारीख: 19.06.2017                                                        अंकित मिश्रा






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